कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के गुंडागर्दी के दावों के बीच एक ऐसी सनसनीखेज कहानी सामने आई है, जिसने राज्य की कानून व्यवस्था और ममता सरकार को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। यह पूरा मामला संदेशखाली से भाजपा की उम्मीदवार रहीं रेखा पात्रा के अपहरण और देश के गृह मंत्री अमित शाह के एक गुप्त रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़ा है।
जब रैली से ठीक पहले गायब हो गईं भाजपा उम्मीदवार
यह घटना 24 अप्रैल 2026 की है, जब संदेशखाली में गृह मंत्री अमित शाह की एक विशाल जनसभा होने वाली थी। मंच सज चुका था, हजारों की भीड़ जुट चुकी थी, लेकिन तभी अचानक खबर आई कि भाजपा उम्मीदवार रेखा पात्रा गायब हैं। उनका मोबाइल फोन लगातार स्विच ऑफ आ रहा था।
मंच के पीछे मौजूद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने घबराते हुए अमित शाह को मंच पर जाने से रोका और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए रैली को रद्द करने की सलाह दी। लेकिन अमित शाह ने बिना किसी घबराहट के रेखा पात्रा का मोबाइल नंबर लिया।
अमित शाह का 'मास्टरस्ट्रोक' और 5 मिनट में लोकेशन क्रैक
सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह ने तुरंत अपनी स्पेशल इंटेलिजेंस और आधुनिक ट्रैकिंग तकनीक को एक्टिव किया। महज 4 से 5 मिनट के भीतर बंद फोन के बावजूद रेखा पात्रा की सटीक लोकेशन ट्रैक कर ली गई। वो रैली स्थल से महज 300 मीटर की दूरी पर एक घर में बंधक थीं।
पब्लिक के बीच पैनिक न फैले और टीएमसी के गुंडों को भनक न लगे, इसके लिए अमित शाह ने एक बड़ा जोखिम लिया। उन्होंने निशिकांत दुबे से कहा, "तुम्हारे पास सिक्योरिटी है, तुरंत जाओ और उसे लेकर आओ। मैं मंच पर जाकर भाषण शुरू करता हूँ।"
मंच पर भाषण, कैमरे के पीछे रेस्क्यू
अमित शाह मंच पर हुंकार भर रहे थे और दूसरी तरफ निशिकांत दुबे अपने कमांडो और सुरक्षाबलों के साथ उस घर पर धावा बोल चुके थे जहां रेखा पात्रा का मुंह और हाथ-पैर बांधकर रखा गया था। जेल में बंद टीएमसी के रसूखदार गुंडे शेख शाहजहां के मुखबिरों ने रेखा पात्रा का नदी पार करते ही अपहरण कर लिया था।
भाषण के दौरान ही अमित शाह ने ऑन-कैमरा बेहद सहजता से निशिकांत दुबे से पूछा कि क्या उम्मीदवार मिल गई हैं? और 100% कन्फर्मेशन के बाद ही उन्होंने रेखा पात्रा को मंच पर जनता से रूबरू कराया, लेकिन माहौल न बिगड़े इसलिए मंच से अपहरण की बात साझा नहीं की।
जिस आवास के लिए खाए धक्के, आज उसी मंत्रालय की बनीं मालिक
रेखा पात्रा की कहानी संदेशखाली के दमन के खिलाफ खड़ी होने वाली एक आम महिला की हिम्मत की मिसाल है। कभी टीएमसी दफ्तर में 'पीएम आवास योजना' के तहत एक घर की गुहार लगाने गईं रेखा पात्रा के साथ शेख शाहजहां ने बदसलूकी की थी और उनके पति को बंधक बनाया था। लेकिन इस चुनाव में न केवल उन्होंने टीएमसी के आतंक को हराया, बल्कि वे चुनाव जीतकर आज कैबिनेट में आवास मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
ममता बनर्जी भले ही केंद्रीय बलों की तैनाती और चुनाव आयोग पर तानाशाही का आरोप लगाती रहें, लेकिन संदेशखाली के इस सच ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल में निष्पक्ष चुनाव कराना कितना चुनौतीपूर्ण था।